घर किराए पर देने वाले समझ लें कानूनी अधिकार

मकान मालिक और किराएदार के बीच एक रिर्टन यानी लिखित रेंट एग्रीमेंट होना जरूरी है।

इस एग्रीमेंट में किराएदार कब तक रहेगा, कितना किराया देगा, डिपोजिट की रकम कितनी दी, इसकी जानकारी होगी।

इसके साथ घर या फ्लैट में रहने की सारी शर्तें लिखी होनी चाहिए।

मॉडल टेनेंसी एक्ट के सेक्शन-5 के अनुसार रेंट एग्रीमेंट एक तय समय तक ही लीगल होगा।

एग्रीमेंट की तारीख खत्म होने के बाद अगर मकान मालिक दोबारा उसी किराएदार को रखना चाहता है, तो उसे दूसरा यानी नया एग्रीमेंट बनाना होगा।

अगर एग्रीमेंट की तारीख खत्म हो जाती है और एग्रीमेंट रिन्यू नहीं होता, तो ऐसे में किराएदार को घर खाली करना होगा।

अगर किराएदार घर खाली करने में असमर्थ है यानी किसी कारण से घर खाली नहीं कर पाया है, तो उसे मकान मालिक को बढ़ा हुआ किराया देना होगा।

किराएदार को तब तक नहीं निकाला जा सकता, जब तक उसने लगातार दो महीनों तक किराया न दिया हो या वह प्रॉपर्टी का गलत इस्तेमाल कर रहा हो।

रेसिडेंशियल बिल्डिंग के लिए सिक्योरिटी अधिकतम 2 महीने का किराया हो सकता है। नॉन रेसिडेंशियल जगहों के लिए अधिकतम 6 महीने का किराया।

किराएदार को हर महीने किराया देने पर रसीद लेने का अधिकार है।

अगर किराएदार घर में नहीं है तो मकान मालिक उसके घर का ताला नहीं तोड़ सकता है। न ही सामान को बाहर फेंक सकता है।

अगर मकान मालिक रेंट एग्रीमेंट में तय की गई शर्तों के अलावा कोई और शर्त उस पर थोपता है या अचानक किराया बढ़ा देता है। तो वो कोर्ट में याचिका दे सकता है।

मकान मालिक बिना बताए किराएदार के घर पर आ नहीं सकता।